पीएम मोदी की अपील के बाद पोलैंड सीमा पर पहुंचे स्वयंसेवक, मोबाइल वैन से 1000 भारतीयों को खाना पहुंचाया

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पीएम मोदी की अपील के बाद पोलैंड सीमा पर पहुंचे स्वयंसेवक, मोबाइल किचन वैन के जरिए 1000 भारतीयों को खाना पहुंचाया, और रहने की व्यवस्था भी करी।

बीएपीएस उन भारतीयों की सेवा में है जो रूस के आक्रमण से त्रस्त यूक्रेन से जान बचाने के लिए पोलैंड आए हैं। यह एक स्वामीनारायण संस्था है जो स्वयंसेवक बिना देखे दिन-रात इस सेवा में जुड़ गए हैं।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दो दिन पहले आधी रात को पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामी को फोन किया और बीएपीएस से यूक्रेन-पोलैंड सीमा पर फसे भारतीय छात्रों की देखभाल करने को कहा। संगठन के आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज के आशीर्वाद से चक्रों को तत्काल आधार पर चालू किया गया और कल बीएपीएस यूरोप स्थित स्वयंसेवक प्रभावितों की सेवा के लिए सीमा पर पहुंच गए।

मोबाइल किचन वैन ने करीब 1000 भारतीयों को खाना परोसा। और छात्रों के लिए शहर के एक प्रसिद्ध होटल के सम्मेलन कक्ष में ठहरने की व्यवस्था भी की है।

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चिरागभाई गोदीवाला, शैलेशभाई भावसार और अन्य स्वयंसेवक प्रमुख बीएपीएस स्वयंसेवक जो पेरिस और स्विटजरलैंड से 22 घंटे की ड्राइव के बाद मोबाइल किचन वैन में छात्रों के साथ यूक्रेन-पोलैंड सीमा के पास रेजो शहर तक पहुंचे हैं। औसतन 1000 छत्रों को शाकाहारी गर्म भोजन परोसा गया।

कई दिन से कड़ाके की ठंड में माइनस तीन-चार डिग्री तापमान में भारतीय छात्रों को यहां गर्मागर्म भारतीय खाना मिलने से राहत मिली है। मिडीय के अनुसार कुछ छात्र दिन में 40-50 किलोमीटर पैदल चलकर साथ में अपना सामान लेकर यहां पहुंचे हैं। उनकी दयनीय स्थिति को देखकर संगठन के स्वयंसेवक भी सहम गए हैं। बीएपीएस के स्वयंसेवक प्यार से गर्मागर्म खाना और गर्माहट देकर उन्हें नई जिंदगी दे रहे हैं।

भारत सरकार की ओर से भारतीय दूतावास ने प्रभावित छात्रों के लिए रेसजो शहर के एक प्रसिद्ध होटल के सम्मेलन कक्ष में ठहरने की व्यवस्था की है। पूरे भारत में सभी समुदायों के छात्रों को समायोजित करने का प्रयास किया जा रहा है। बीएपीएस के स्वयंसेवक ईमानदारी से उनकी मदद कर रहे हैं।

(फोटो का श्रेय: दिव्यभास्कर)

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